सलाहकार

आज हम इतने ज्यादा व्यस्त हो गए है कि हम लोगो से मेल मिलाप और किसी बात की सलाह मशविरा का वक़्त नहीं है या फिर हम इसका महत्त्व नहीं जानते या  इस  पर गौर नहीं करते की  हमारा सलाहकार कौन है | 

जब टीवी  नहीं था तो  पूरा परिवार एक साथ बैठता था ,अब इंटरनेट से छोटा परिवार भी साथ नहीं आ पाता | तो पारिवारिक जमावड़ा  मुश्किल से हो पाता है | 

जब परिवार नहीं मिल पाता तो दोस्तों से मिल बैठकर  सलाह मशवरा  भी नहीं हो पाता| और हम सभी पर भरोसा भी नहीं करते | 

जब यह हालात है की हम समय नहीं निकाल  पाते  तो निर्णय कैसे हो | 

यह भी सही  है इंटरनेट पर जानकारी उपलब्ध है |  गौर  करियेगा  जानकारी है पर अनुभव नहीं | रेटिंग  है पर सही या गलत पता नहीं | 

और  यह भी नहीं की हर बात गलत हो  पर जो बात ह्यूमन to ह्यूमन होती है उसका तोड़ अन्य किसी मे नही | 

अब तक हम वो  काम कर रहे है जो हमारा है  और उसमे हमे महारत है |  पर हमे हर काम आता है ? इसका जवाब नहीं में ज्यादा मिलेगा | 

इंसान अपने अनुभव बताने में संकोच नहीं करता चाहे अच्छे हो या बुरे | हम अब मुद्दे की बात करते है ,जैसा ऊपर हमने देखा की हमे हर काम नहींआता  पर सभी पर विश्वास करना आसान भी नहीं  होता | अब हम क्या करे ?

पुराने समय की  घटनाओ को देखे तो हम पाएंगे की सलाहकार अच्छा और हमारा हितेषी होना चाहिए | महाभारत का युद्ध अगर हम देखे तो इसका सटीक उदहारण मिलता है | 

कौरवो के सलाहकार मामा शकुनि थे और पांडवों के श्रीकृष्ण | 

अगर हम तुलनात्मक देखे तो मामा शकुनि कुरु वंश का नाश चाहते थे वो अपनी बहन गांधारी के फैसले से आहत थे की उन्होंने धृतराष्ट्र से विवाह किया जो की जन्म से अंधे थे | इस फैसले में गांधार नरेश का साथ होने की वजह से वो कुछ न कर सके | 

उन्होंने वक़्त का इंतजार किया और तब तक अपनी योजनाओ पर काम करते रहे जिससे कौरवों का नुकसान कर सके | 

वरन इसके विपरीत श्रीकृष्ण पांडवो के साथ हर कदम साथ ही नहीं दिया बल्कि उन्हें सही निर्णय लेने में मददत भी की | जिससे अंत में पांडवो की विजय सुनिश्चित हो गई | 

यहाँ एक बात गौर करने की ये है की पांडवो ने हमेशा सही कदम और सही सलाहकार श्रीकृष्ण को चुना|  और उनकी बात सुनी तथा उस पर कदम उठाया | इसके उलट कौरवो के सलाहकार अपने फायदे के लिए उनका उपयोग कर रहे थे | 

यहाँ सलाहकार कौन और उनको चुनने वाले की काबिलियत भी मायने रखती है , देखे परखे और उसके चयन की प्रक्रिया को पूर्ण करे | जब आप अपने आप पर पूर्ण भर\भरोसा कर ले तब आप किसी को अपना सलाहकार  चुने और फिर आगे बड़े | 

हम गलती ये करते है की हर चीज जल्दबाजी में करते है और फिर जब बात नहीं बनती तो फिर इधर उधर देखना चालू करते है | 

पहले फॅमिली डॉक्टर होते थे और वो सभी का इलाज ही नहीं करते थे बल्कि एक पारिवारिक सदस्य की तरह से सलाह भी देते थे | 

सोचिये समझिये और फैसला कीजिये क्युकी सबको सलाह चाहिए साथ साथ उम्दा सलाहकार भी | ये जरूरी नहीं की उसे वो सब ज्ञाता हो पर आपका हित चाहने वाला हो | 


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